World Hemophilia Day: Hidden bleeding disorder in women often goes undiagnosed, warn doctors
In recent years, in vitro fertilisation (IVF) has emerged as a powerful solution for couples facing fertility challenges. With advancements in medical science, many people believe IVF can overcome almost any reproductive issue, regardless of age.
However, experts say that this is not entirely true.
Age remains one of the most important factors influencing fertility, even with assisted reproductive techniques like IVF. While the treatment can significantly improve the chances of conception, it cannot fully reverse the natural ageing process of the body.
मैंने इतने सालों के अनुभव में देखा है कि अक्सर लोग मानते हैं कि मां बनने के लिए सिर्फ महिलाओं की उम्र मायने रखती है, जबकि पुरुषों पर उम्र का कोई असर नहीं होता। लेकिन यह धारणा ठीक नहीं है। पुरुषों में भी उम्र बढ़ने के साथ शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या प्रभावित होती है। इसका सीधा असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है और गर्भधारण में देरी हो सकती है। इतना ही नहीं, अधिक उम्र के साथ कुछ मामलों में आनुवंशिक समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसीलिए, जागरूकता और सही समय पर बेबी प्लानिंग करना बेहद आवश्यक है।
आमतौर पर समाज में आज भी कई पुरुष अपनी प्रजनन क्षमता को लेकर या तो जागरूक नहीं होते हैं, या फिर शर्म और समाज के डर से इस विषय पर बात करने से कतराते हैं। यही वजह है कि वे या तो अपनी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं या चुपचाप सहते रहते हैं। लेकिन सच तो यह है कि महिलाओं की तरह ही पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी उम्र और लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारणों से समय के साथ प्रभावित हो सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की भी प्रजनन क्षमता में धीरे-धीरे कमी आने लगती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शुक्राणुओं (स्पर्म) की संख्या, उनकी गुणवत्ता और गतिशीलता (मोटिलिटी) प्रभावित होती है। इसके अलावा, डीएनए में क्षति का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे आनुवंशिक समस्याओं की संभावना बढ़ सकती है। हार्मोनल बदलाव भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं।
स्पर्म की गुणवत्ता और गतिशीलता (मोटिलिटी) के साथ-साथ लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारक- जैसे अधिक तनाव, असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान या शराब का सेवनभी शुक्राणुओं की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा, कुछ लंबी अवधि की बीमारियां भी प्रजनन क्षमता को कमजोर कर सकती हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि गर्भधारण संभव नहीं है, लेकिन इसमे देरी हो सकती है।
अनहेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले पुरुषों में कम उम्र में ही प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, जो पुरुष स्मोकिंग करते हैं, शराब का सेवन करते हैं, असंतुलित खान-पान हैं या नियमित व्यायाम नहीं करते, उनमें फर्टिलिटी जल्दी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, डायबिटीज, संक्रमण, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार गर्मी या हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहना (जैसे गर्म पानी से नहाना या लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना) भी स्पर्म की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इसलिए, आदर्श रूप से पुरुषों को 20 से 30 वर्ष की आयु में पिता बनने की योजना बना लेनी चाहिए।
अगर कोई पुरुष40 से 45 वर्ष की आयु के बाद पिता बनता है, तो बच्चे के स्वास्थ्य पर कुछ जोखिम बढ़ सकते हैं। उम्र बढ़ने के कारण शुक्राणुओं की क्षमता कमजोर होने लगती है और उनके डीएनए डैमेज होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे आनुवंशिक म्यूटेशन का जोखिम भी बढ़ सकता है। इससे ऑटिज्म, सिजोफ्रेनिया और कुछ जन्मजात दोष (बर्थ डिफेक्ट्स) जैसी स्थितियां जुड़ सकती हैं। हालांकि, कुल मिलाकर यह जोखिम आमतौर पर कम ही रहता है।
पुरुष अपनी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कुछ सरल और प्रभावी कदम अपना सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
अंत में, लेकिन बेहद अहम बात यह है कि फैमिली प्लानिंग करते समय पुरुषों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले अपनी सेहत, उम्र और आर्थिक स्थिति का सही आकलन करें। जब इन सभी पहलुओं को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएं, तब विशेषज्ञ की सलाह लेकर सही समय पर फैमिली की शुरुआत करनी चाहिए।