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शुक्राणु की कमी

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शुक्राणु की कमी

इसे पुराने ज़माने से चली आ रही परेशानी कहें या आधुनिक जीवन शैली की वजह से आया विकार, पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी आजकल आम हो गयी है. इसे शहर की सड़कों से बाहर नामर्दी की अचूक दवा बेचने वाले वज्ञापनों की अधिकता में भी समझा जा सकता है.

सबसे पहले यही समझने की कोशिश करते हैं कि एक इंसान में शुक्राणु की कमी का क्या असर पड़ता है. इसका सीधा सरल उत्तर यह है कि ऐसे पुरुष अपना वंश नहीं बढ़ा पाते, मतलब ऐसे इंसान बच्चे पैदा करने में असमर्थ होते हैं. इसे ही पुरुषों का बाँझपन भी कहा जाता है. ऐसे लोगों को सामाजिक एवं पारिवारिक शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है. इससे इतर यह एक स्वस्थ शरीर आ भी मसला है.

लेकिन अगर इसके सही कारणों की पड़ताल की जाय तो इस चिंता से मुक्ति मिल सकती है. आइये जानते हैं कि पुरुषों में शुक्राणु की कमी क्या और क्यों होती है.

जब पुरुष के वीर्य में प्रति मिलिलीटर शुक्राणुओं की संख्या डेढ़ करोड़ से कम होती है तो मेडिकल की भाषा में कहा जाता है कि अमुक व्यक्ति का स्पर्म काउंट कम है. कम शुक्राणु होने को ओलीगोस्पर्मिया कहते हैं. आगे वीर्य में एक भी शुक्राणु नहीं हा तो इसे एजूस्पर्मिया कहते हैं. कम स्पर्म वाले पुरुष अपने साथी को गर्भवती नहीं कर पाते या इसमें उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

इसका मतलब है कि महिला को स्वस्थ रूप से गर्भवती करने के लिए स्वस्थ और अधिक स्पर्म काउंट की आवश्यकता होगी.

किसी पुरुष में शुक्राणु कम होने के कई कारण हो सकते हैं. यह हार्मोन में अनुवाँशिक असंतुलन की वजह से भी होता और अधिक नशा करने से ऐसा होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं. अगर जीवनशैली सही ना हो, मसलन आपको अच्छी नींद ना आती हो, आप तनाव में रहते हों तो ऐसी स्थिति में आपके लैंगिक स्वास्थ्य पर भारी असर पड़ सकता है.

कम स्पर्म काउंट वाले पुरुषों में कामेक्षा की कमी भी देखी जाती है. उनकी सेक्स में कम रूचि होती है. वृषण क्षेत्र में गाँठ, सूजा या दर्द की वजह से भी शुक्राणु की कमी हो सकती है. हाँलांकी शुक्राणु के बनने की प्रक्रिया काफी जटिल है लेकिन आधुनिक विज्ञान की प्रगति ने इसके कारणों और निदान की अच्छी पड़ताल कर ली है. हमें समझना चाहिए कि एक सक्रिय शुक्राणु ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकता है. संख्या, गति और आकार के आधार पर ही एक स्वस्थ शुक्राणु माने जाते हैं. अगर एक का भी सिस्टम ख़राब है तो मादा अंडे का स्वस्थ निषेचन संभव नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वीर्य के सैंपल में कम से कम 40% शुक्राणु सक्रिय होना चाहिए, तभी वह एक स्वस्थ और सक्रिय सीमेन काउंट होगा. यूं तो साथी के अंडे को फर्टिलाइज़ करने के लिए एक ही शुक्राणु काफी है, लेकिन फिर भी इनकी संख्या जितनी अधिक होगी, तयशुदा फ़र्टिलाइसशन की गुंजाइश रहेगी.

स्पर्म काउंट कम होने के कुछ कारण निम्नलिखित हैं :

वृषण से निकलने वाली नसों में ज़ब सूजन हो जाता है तो शुक्राणु की कमी हो सकती है. इसके अलावा यौन आधारित संक्रमण, नशे और तनाव की वजह से शुक्राणु की संख्या में कमी हो सकती है. यदि किसी व्यक्ति में स्खलन की समस्या है तो इससे भी स्पर्म काउंट में कमी आ सकती है. लंबे समय तक साइकिल चलाने से भी वीर्य में स्पर्म की कमी हो सकती है.

ऐसा नहीं है कि इस विकार को दूर नहीं किया जा सकता. अगर कुछ चीज़ेँ तय कर ली जाएँ, तो निश्चित रूप से वीर्य में शुक्राणु की कमी को पूरा किया जा सकता है. अगर आप नीचे दिए नुस्खे अपनाते हैं तो शुक्राणु की कमी की समस्या से निजात पा सकते हैं.

धूम्रपान एकदम न करें. यह स्पर्म काउंट कम होने की बड़ी वजह है. पुरुषों में धूम्रपान की आदत आम है और इसी वजह से स्पर्म में कमी भी पुरुषों में आम है.

शराब का सेवन सीमित मात्रा में करें या बिलकुल ना करें. आधुनिक जीवन में शराब भी लोगों के जीवन से काफी जुड़ गया है. लोग आम तौर पर काम के दबाव के बाद शराब का सेवन करते हैं. अगर यह सीमित मात्रा में हो तो ठीक, वरना यह परेशानी का सबब बन सकता है.

ड्रग्स से बेहद सतर्कता और दूरी बरतें. आजकल नौजवानों में इकी लात काफी तेजी से फैली है. यह केवल लैंगिक नहीं बल्कि कई तरह के बीमारियों को न्योता देता है.

अपने डॉक्टर से उन दवाओं के बारे में बात करें, जो शुक्राणुओंके उत्पादन कोप्रभावित कर सकती हैं या उनकी संख्या को कम कर सकती है. ऐसी कई दवा होती हैं जो आपके लैंगिक स्वास्थ्य पर असर डालती है अतः अपने डॉक्टर से सलाह मशवरा करके ही दवाई का प्रयोग करें.

वजन कम करें. इसके लिए नियमित व्यायाम करें. एक उम्र के बाद परुषों में मोटापा आम है. मोटापा कई बीमारियों की जड़ है.

तनाव से दूर रहें और खुश रहने की कोशिश करें. यह एक स्वस्थ शरीर बनाने की प्राथमिक शर्त है.

ऐसा माना जाता है कि पुरुष अगर एक साल तक अपनी साथी के साथ नियमित सेक्स कर रहा है और तब ही संतान की उत्पत्ति नहीं हो रही तो यह माना जाता है कि अमुक व्यक्ति के शुक्राणु की संख्या में जरूर कोई कमी है. ऐसी स्थिति में पुरुष को अपनी जांच करवानी चाहिए लेकिन कई बार ऐसा होता है कि पुरुष अपने अहंकार में इसकी जांच नहीं करवाता और अपनी पत्नी पर बाँझ होने का आरोप लगाता है. यह ग़लत है और ऐसे पुरुषों को विज्ञान की शरण में जाना चाहिए.

शुक्राणु में कमी माने स्पर्म काउंट म होने के कई तरह के जांच उपलब्ध हैं, जिनमें कुछ का ज़िक्र नीचे है:

सामान्य फिटनेस टेस्ट. यह यूं भी करवाते रहना चाहिए ताकि शरीर कि अवस्था पता रहे.

वीर्य का अध्ययन यह इलाज की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और सबसे पहला काम है.

हार्मोन टेस्ट. हमारी जीवन जीने के तौर तारीकों ने हार्मोन के स्तर पर हम में काफी असंतुलन बना दिया है. और यह असंतुलन कई बार दवाई और विज्ञान की मदद से ही पूरा किया जा सकता है.

जेनेटिक टेस्ट. जैसा कि हम पहले भी ज़िक्र कर चुके हैं, स्पर्म की कमी की एक वजह अनुवाँशिक भी होती है, अतः ये जांच जरूरी है कि सारे हार्मोन सही मात्रा में बन रहे हैं या नहीं.

टेस्टिक्युलर बायोप्सी.

अंडकोष का अल्ट्रासाउंड.

ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड टेस्ट.

इजैक्युलेशन के बाद यूरिन की जांच

शुक्राणु रोधक एंटीबॉडी परीक्षण

शुक्राणु के विशेष कार्य का परीक्षण

तो अब सोचते हैं इसके निदान के बेहतर उपाय या हो सकते हैं.

सबसे पहले तो अपनी जीवनशैली से शुरुआत करनी चाहिए. हमें रुक कर सोचना चाहिए कि आपकी स्पर्म काउंट का घटता स्तर एक चिंता का विषय है. इसमें सुधार तभी संभव है जब जीवन में नियमित और सकारात्मक परिवर्तन हों. हम ज़्यादा से ज़्यादा सब्जी, फल और ड्राई फ्रूट्स को अपने आहार में जगह दें और अस्वस्थ खाने से बचें. अपनी साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें. क्लिनिकल उपाय और भी है लेकिन प्राथमिक तौर पर तो इन नियमों का ही पालन करना चाहिए. डॉक्टर अमूमन ये सलाह देते हैं:

हार्मोन उपचार और दवाएं, संक्रमण का इलाज, सर्जरी और असिस्टड रिप्रोडक्टिव तकनीक इत्यादि.

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