खर्चा कितना लगेगा? यही वो सवाल है जो IVF के बारे में सोचते ही सबसे पहले दिमाग में आता है, अक्सर इलाज की डिटेल्स से भी पहले। जवाब सीधा दें तो, भारत में एक बेसिक साइकल का बजट मोटे तौर पर एक से ढाई लाख रुपये के आसपास बैठता है। मेडिसिन्स भारी पड़ जाएं, या ICSI जैसा कुछ ऐड हो जाए, तो यह आंकड़ा साढ़े तीन लाख तक भी छू सकता है। यह कोई फिक्स रेट कार्ड नहीं है, शहर बदलेगा, क्लिनिक बदलेगा, आपकी मेडिकल हिस्ट्री बदलेगी, तो नंबर भी बदल जाएगा। पर बजट प्लान करने से पहले एक मोटा अंदाजा होना जरूरी है, वरना बीच में जाकर फाइनेंशियल शॉक लगना आम बात है। यहां पूरा हिसाब-किताब खोलकर रखेंगे, कहां कितना जाता है, एक्स्ट्रा प्रोसीजर्स कब जुड़ते हैं, और खर्चा मैनेज करने के प्रैक्टिकल तरीके भी।
| ज़रूरी बातें एक नज़र में • बेसिक IVF साइकल का बजट आमतौर पर एक से ढाई लाख रुपये तक रहता है। • ICSI, embryo freezing या PGT जुड़ जाए तो आंकड़ा साढ़े तीन लाख या उससे ऊपर भी जा सकता है। • अकेले मेडिसिन्स और इंजेक्शन्स ही सबसे बड़ा खर्चा बन जाते हैं, अक्सर इसका अंदाजा पहले से नहीं होता। • कुछ क्लिनिक्स zero-interest EMI देते हैं, कुछ इंश्योरेंस में लिमिटेड फर्टिलिटी कवरेज भी मिल जाता है। • फाइनल नंबर शहर, क्लिनिक और मेडिकल जरूरत, तीनों पर निर्भर करता है। |
एक IVF साइकल का औसत बजट एक से ढाई लाख रुपये के बीच माना जाता है, बेसिक प्रोसीजर, मेडिसिन्स और मॉनिटरिंग सब इसी में समा जाता है। मेट्रो में यह डेढ़ से ढाई लाख तक चला जाता है, टियर-2 शहरों में सवा-डेढ़ लाख में भी काम बन सकता है। एक बात साफ कर दें, कोई भी क्लिनिक फोन पर एग्जैक्ट नंबर नहीं देगा, और अगर देता है, तो थोड़ा सावधान रहिए। हर IVF Treatment जर्नी अलग होती है, डॉक्टर का एक्सपीरियंस, लैब की क्वालिटी, मरीज की उम्र और कंडीशन, सब मिलकर फाइनल नंबर तय करते हैं। इसलिए क्लिनिक से बात करते वक्त पूरा ब्रेकडाउन लिखित में मांगिए, सिर्फ वर्बल एस्टीमेट पर भरोसा मत कीजिए। IVF Treatment Cost गाइड में यह और डिटेल में समझाया गया है।
IVF कराने में कितना खर्चा आता है, यह जानने का सबसे सीधा तरीका है, पूरे साइकल को टुकड़ों में तोड़कर देखना। हर स्टेज का अपना बिल है, और मिलाकर ही फाइनल फिगर बनता है।
सफर शुरू होता है डॉक्टर से मिलने से, फिर ब्लड टेस्ट्स, अल्ट्रासाउंड, सीमेन एनालिसिस जैसी शुरुआती जांचें। यह हिस्सा जेब पर ज्यादा भारी नहीं पड़ता, दस से पच्चीस हजार के आसपास निपट जाता है, हालांकि किसे कितनी जांच चाहिए यह केस-टू-केस अलग होता है। Infertility Test Cost पर पूरी लिस्ट मिल जाएगी।
अब असली खर्चा शुरू होता है। सुनकर अजीब लगे, पर सबसे बड़ा बिल दवाओं का बनता है, इलाज का नहीं। ओवरीज को स्टिमुलेट करने वाले हार्मोनल इंजेक्शन्स चालीस हजार से शुरू होकर नब्बे हजार तक पहुंच सकते हैं, उम्र जितनी ज्यादा, डोज़ उतना भारी, और बिल भी उतना ही। एग रिट्रीवल की प्रोसीजर फीस अलग से आती है, तीस से पचास हजार के बीच कहीं। एक सलाह, मेडिसिन का बजट बनाते वक्त थोड़ा एक्स्ट्रा कुशन रखिए, क्योंकि यही वो जगह है जहां एस्टीमेट से ऊपर जाने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं।
फिर बारी आती है लैब की। Embryology Lab में फर्टिलाइजेशन और embryo culture ज्यादातर बेसिक पैकेज में ही कवर हो जाता है, पर ट्रांसफर प्रोसीजर की अलग फीस लगती है, बीस से चालीस हजार के आसपास। यह स्टेप छोटा जरूर है, पर सबसे क्रिटिकल भी, यहीं तय होता है कि पूरा साइकल काम आया या नहीं। इसलिए यहां सस्ते के चक्कर में क्वालिटी से समझौता करना समझदारी नहीं, अच्छी लैब और experienced एम्ब्रियोलॉजिस्ट टीम, दोनों उतने ही जरूरी जितना कॉस्ट कॉम्पिटिटिव होना।
बेसिक पैकेज हमेशा काफी नहीं होता। कभी-कभी कुछ एक्स्ट्रा जुड़ जाता है, पर याद रखें, सिर्फ तब जब मेडिकली जरूरी हो, हर किसी के बिल में ये चीजें अपने आप नहीं आ जातीं। यही वो जगह भी है जहां क्वोट किया गया शुरुआती नंबर और फाइनल बिल सबसे ज्यादा अलग दिख सकते हैं।
IVF में कुल कितना खर्चा आता है, यह सवाल दरअसल इन्हीं ऐड-ऑन्स पर टिका होता है। Advanced IVF Solutions के तहत ये सारे ऑप्शन सिर्फ जरूरत के हिसाब से सुझाए जाते हैं, सबको इनकी जरूरत नहीं होती, तो घबराने की बात नहीं।
पैसों की वजह से इलाज टालना, यह सबसे मुश्किल फैसलों में से एक है, पर अब इसका बोझ थोड़ा कम करने के रास्ते भी हैं। EMI इनमें से एक है, कई क्लिनिक्स अब जीरो-इंटरेस्ट EMI देने लगे हैं, यानी पूरा पैसा एक झटके में नहीं, महीनों में फैलाकर चुकाया जा सकता है। इससे शुरुआत में बड़ी रकम जुटाने का प्रेशर काफी हल्का हो जाता है।
दूसरा रास्ता इंश्योरेंस है, हालांकि यहां उम्मीदें बहुत ज्यादा मत रखिए। कुछ पॉलिसीज में अब लिमिटेड फर्टिलिटी कवरेज शामिल होने लगा है, पर यह हर पॉलिसी में नहीं, और कवरेज की डिटेल कंपनी-दर-कंपनी अलग होती है। सबसे प्रैक्टिकल सलाह, ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले क्लिनिक से फाइनेंसिंग ऑप्शंस के बारे में सीधे पूछ लीजिए, और अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी एक बार खुद पढ़ भी लीजिए, बाद में सरप्राइज से बेहतर है पहले से क्लियर रहना।

| नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी में कॉस्ट को लेकर पारदर्शिता • ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले पूरा और डिटेल्ड कॉस्ट ब्रेकडाउन दिया जाता है, कोई हिडन चार्ज नहीं। • सिर्फ मेडिकली जरूरी प्रोसीजर्स ही रिकमेंड किए जाते हैं, बिना वजह ऐड-ऑन्स नहीं थोपे जाते। • EMI और फाइनेंसिंग ऑप्शंस को लेकर क्लिनिक टीम से खुलकर बात की जा सकती है। |
आखिर में एक बात, अधूरी जानकारी ही सबसे ज्यादा स्ट्रेस देती है। एक बार पूरा हिसाब सामने आ जाए, प्लानिंग करना और सही क्लिनिक चुनना, दोनों काफी हल्के लगने लगते हैं।
बेसिक साइकल के लिए एक से ढाई लाख रुपये का बजट सोचकर चलिए, हालांकि फाइनल आंकड़ा क्लिनिक, शहर और जरूरी टेस्ट्स के हिसाब से ऊपर-नीचे हो सकता है।
फिक्स नंबर नहीं है, उम्र और मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करता है। पहले अटेम्प्ट में सक्सेस चांस तीस-पैंतीस फीसदी के आसपास रहता है, दो-तीन साइकल तक ट्राई करने पर यह पचास-साठ फीसदी तक भी पहुंच सकता है।
पूरा कवरेज मिलना अभी भी अपवाद ही है, नियम नहीं। कुछ पॉलिसीज में लिमिटेड फर्टिलिटी कवरेज जरूर मिलने लगा है, अपनी पॉलिसी की डिटेल इंश्योरर से खुद कन्फर्म कर लेना बेहतर रहेगा।
सीधा "सस्ता" शायद न मिले, पर स्मार्ट प्लानिंग से बहुत फर्क पड़ता है, जैसे EMI का इस्तेमाल करना, शुरू में ही पूरा ब्रेकडाउन समझ लेना, और सिर्फ वही प्रोसीजर्स चुनना जो सच में जरूरी हों।