एम्ब्रियो ट्रांसफर क्या होता है? पूरी प्रोसेस और केयर गाइड

एम्ब्रियो ट्रांसफर क्या होता है? पूरी प्रोसेस और केयर गाइड

आईवीएफ जर्नी में एम्ब्रियो ट्रांसफर वाला दिन शायद सबसे इमोशनल दिन होता है। महीनों की तैयारी, इंजेक्शन्स, मॉनिटरिंग, सब कुछ इसी एक दिन पर आकर टिक जाता है। बहुत सी महिलाएं इस प्रोसेस को लेकर नर्वस रहती हैं, क्या दर्द होगा, क्या गलत हो सकता है, कितना वक्त लगेगा। सच यह है कि एम्ब्रियो ट्रांसफर क्या होता है, यह जितना जटिल सुनने में लगता है, असल में उतना है नहीं। यह लैब में बना embryo वापस uterus में रखने का एक छोटा सा प्रोसीजर है, कोई बड़ी सर्जरी नहीं। यहां आसान भाषा में समझेंगे कि एम्ब्रियो ट्रांसफर कैसे होता है, दर्द होता है या नहीं, और उसके बाद किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

ज़रूरी बातें एक नज़र में
• यह एक छोटा प्रोसीजर है, uterus में embryo रखा जाता है, सर्जरी नहीं।   
• ज्यादातर मामलों में एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं पड़ती, हल्की चुभन या प्रेशर महसूस हो सकता है।   
• इसके बाद करीब 10-14 दिन का इंतजार होता है, beta hCG टेस्ट तक।   
• हल्की क्रैंपिंग या स्पॉटिंग नॉर्मल हो सकती है, पैनिक करने की जरूरत नहीं।   
• हैवी लिफ्टिंग, एक्सरसाइज, हॉट बाथ और स्मोकिंग-अल्कोहल से बचना जरूरी है।

एम्ब्रियो ट्रांसफर क्या होता है?

सीधे शब्दों में, एम्ब्रियो ट्रांसफर एक IVF treatment प्रोसीजर है जिसमें लैब में तैयार किया गया embryo महिला के uterus में रखा जाता है, ताकि प्रेगनेंसी शुरू हो सके। यह पूरी आईवीएफ प्रोसेस का आखिरी और सबसे अहम स्टेप है। इससे पहले egg retrieval और fertilization हो चुका होता है, Embryology टीम कुछ दिनों तक embryo की ग्रोथ मॉनिटर करती है, और जब वह सही स्टेज पर पहुंच जाता है, तभी ट्रांसफर किया जाता है। इसमें कोई कट नहीं लगता, कोई टांका नहीं, बस एक पतली कैथेटर के जरिए embryo को uterus तक पहुंचाया जाता है।

एम्ब्रियो ट्रांसफर कैसे होता है?

एम्ब्रियो ट्रांसफर कैसे होता है, यह समझने के लिए इसे दो हिस्सों में देखना आसान है, पहला ट्रांसफर से पहले की तैयारी, और दूसरा खुद ट्रांसफर वाला दिन।

ट्रांसफर से पहले की तैयारी

ट्रांसफर से पहले uterus lining को सही मोटाई और क्वालिटी तक पहुंचाया जाता है, आमतौर पर hormonal medicines के जरिए। डॉक्टर ultrasound से यह चेक करते हैं कि लाइनिंग embryo को accept करने के लिए तैयार है या नहीं। एक और छोटी लेकिन जरूरी बात, प्रोसीजर से पहले bladder को थोड़ा भरा हुआ रखने को कहा जाता है, क्योंकि इससे ultrasound पर uterus बेहतर दिखता है और कैथेटर को सही एंगल पर गाइड करना आसान हो जाता है। इसके अलावा डॉक्टर embryo की क्वालिटी, ग्रेड और मरीज की ओवरऑल हेल्थ भी एक बार फिर चेक कर लेते हैं।

ट्रांसफर के दिन क्या एक्सपेक्ट करें

प्रोसीजर वाले दिन क्लिनिक में रिपोर्टिंग टाइम पहले से बता दिया जाता है, आमतौर पर अपॉइंटमेंट से करीब आधा घंटा पहले पहुंचने को कहा जाता है। मरीज को एक प्रोसीजर रूम में ले जाया जाता है, जहां Advanced IVF Solutions के तहत एक पतली, सॉफ्ट कैथेटर के जरिए embryo को ultrasound गाइडेंस में uterus के अंदर रखा जाता है। पूरा प्रोसीजर 10 से 15 मिनट में खत्म हो जाता है, हालांकि क्लिनिक में मॉनिटरिंग और रेस्ट मिलाकर करीब 1 से 2 घंटे लग सकते हैं। ज्यादातर महिलाएं इस दौरान हल्का प्रेशर महसूस करती हैं, दर्द नहीं। पार्टनर या फैमिली मेंबर को साथ ले जाने की इजाजत ज्यादातर क्लिनिक्स में होती है, जो इमोशनली सपोर्ट के लिहाज से भी मददगार रहता है। इसके बाद कुछ देर आराम करके उसी दिन घर जाया जा सकता है।

क्या एम्ब्रियो ट्रांसफर पेनफुल होता है?

सीधा और भरोसा देने वाला जवाब, नहीं। नॉर्मली दर्द नहीं होता। ज्यादातर महिलाओं को हल्की चुभन या प्रेशर जैसा एहसास होता है, ठीक वैसा ही जैसा पैप स्मीयर टेस्ट के दौरान होता है। इसीलिए इस प्रोसीजर में एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह इतना इनवेसिव नहीं होता कि सुलाने की जरूरत पड़े। हां, bladder फुल रखने की वजह से कुछ महिलाओं को हल्की बेचैनी जरूर महसूस हो सकती है, पर वह प्रोसीजर खत्म होते ही ठीक हो जाती है। तो अगर सवाल यही है कि embryo transfer painful hota hai kya, तो जवाब है, ज्यादातर मामलों में नहीं।

Embryo transfer procedure

 

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद क्या होता है?

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद क्या होता है, यह सवाल हर मरीज के मन में सबसे ज्यादा घूमता है, और यह सवाल जायज भी है, क्योंकि यही वो फेज है जिसमें सब्र की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है।

ट्रांसफर के बाद शरीर में हल्के बदलाव नॉर्मल हैं, इनसे घबराने की जरूरत नहीं। कुछ महिलाओं को हल्की क्रैंपिंग महसूस होती है, कुछ को हल्की स्पॉटिंग भी दिख सकती है, यह दोनों ही आमतौर पर चिंता की बात नहीं। इसके बाद शुरू होता है वेट पीरियड, यानी करीब 10 से 14 दिन का इंतजार, जब तक beta hCG blood test से प्रेगनेंसी कन्फर्म नहीं हो जाती। यह वक्त इमोशनली सबसे मुश्किल हिस्सा होता है, कई महिलाएं हर छोटे-मोटे symptom को ओवरएनालाइज करने लगती हैं, हर हल्की सी क्रैंप पर गूगल खोलकर बैठ जाती हैं। असल में यह बिल्कुल नॉर्मल रिएक्शन है, पर याद रखें कि हर शरीर अलग तरह से रिस्पॉन्ड करता है, इसलिए किसी और की स्टोरी से अपनी तुलना करने से बचें। इस दौरान खुद पर नरमी रखें, रूटीन को जितना हो सके नॉर्मल रखें, और उम्मीद के साथ रिजल्ट का इंतजार करें। ज्यादा जानकारी के लिए Post Embryo Transfer केयर गाइड पर भी एक नजर डाली जा सकती है।

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद क्या नहीं करना चाहिए?

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद क्या नहीं करना चाहिए, यह जानना उतना ही जरूरी है जितना यह जानना कि क्या करना चाहिए। इस फेज में शरीर को थोड़ा वक्त और सुकून चाहिए होता है, इसलिए कुछ आदतें और एक्टिविटीज कुछ दिनों के लिए टाल देना ही बेहतर रहता है।

ट्रांसफर के बाद इन बातों का रखें ध्यान
• हैवी लिफ्टिंग या ज्यादा फिजिकल एक्सर्शन वाले काम अभी टालें।   
• हैवी एक्सरसाइज, जिम या इंटेंस वर्कआउट से बचें, हल्की वॉक ठीक है।   
• हॉट बाथ, सौना या स्टीम बाथ अवॉइड करें, बॉडी टेंपरेचर स्टेबल रखना बेहतर है।   
• अल्कोहल और स्मोकिंग पूरी तरह बंद रखें, यह implantation पर असर डाल सकते हैं।   
• डॉक्टर की बताई मेडिसिन्स समय पर लें, खुद से कोई डोज़ स्किप या एडजस्ट न करें।
नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी में ट्रांसफर डे पर क्या अलग है
• Embryology टीम हर embryo की ग्रेडिंग देखकर सबसे सही ट्रांसफर टाइमिंग तय करती है।   
• एडवांस्ड लैब सेटअप और ultrasound-गाइडेड तकनीक ट्रांसफर को ज्यादा सटीक बनाती है।   
• हर मरीज को प्रोसीजर से पहले और बाद, दोनों वक्त पूरी गाइडेंस दी जाती है।   
• फ्रेश हो या फ्रोजन ट्रांसफर, दोनों के लिए पर्सनलाइज्ड प्रोटोकॉल फॉलो किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

एम्ब्रियो ट्रांसफर में कितना समय लगता है?

प्रोसीजर खुद सिर्फ 10 से 15 मिनट का होता है, पर क्लिनिक में मॉनिटरिंग और रेस्ट मिलाकर करीब 1 से 2 घंटे का वक्त लग सकता है।

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद प्रेगनेंसी कन्फर्म कब होती है?

आमतौर पर ट्रांसफर के 10 से 14 दिन बाद beta hCG blood test से प्रेगनेंसी कन्फर्म की जाती है। इससे पहले घर पर यूरिन टेस्ट करने से बचना चाहिए, क्योंकि रिजल्ट गलत आ सकता है।

क्या एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद बेड रेस्ट जरूरी है?

पूरी तरह बेड रेस्ट की जरूरत नहीं होती, ज्यादातर डॉक्टर सिर्फ कुछ घंटों का आराम सजेस्ट करते हैं। हां, अगले कुछ दिन हैवी एक्टिविटी और स्ट्रेस से बचना जरूर फायदेमंद रहता है।

फ्रेश और फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर में क्या फर्क है?

फ्रेश ट्रांसफर में embryo को उसी साइकल में बनने के कुछ दिन बाद सीधे ट्रांसफर कर दिया जाता है, जबकि फ्रोजन ट्रांसफर में embryo को पहले फ्रीज करके बाद के किसी साइकल में ट्रांसफर किया जाता है। दोनों के अपने फायदे हैं, और डॉक्टर मरीज की बॉडी और हिस्ट्री देखकर सही ऑप्शन सजेस्ट करते हैं। पूरी तुलना Fresh vs Frozen Embryo Transfer में देखी जा सकती है।

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